03 June 2010

ब्लागर मीट के आयोजकों

मैं और नीरज जाटजी जब नांगलोई जाट धर्मशाला के सामने पहुंचें तो देखा श्री अविनाश जी बाहर ही खडे सब आने वालों का स्वागत कर रहे हैं। अन्दर पहुंचते ही   श्री राजीव तनेजा जी और सुश्री संजू तनेजा जी एकदम दौडकर पास आये और हाथ जोड कर स्वागत किया। इतने में ही प्रिय माणिक तनेजा  कोल्ड ड्रिंक्स लेकर आ गये। पहली बात तो इस तरह का आयोजन करना सबके बसकी बात नहीं है। फिर इतनी गर्मी में भाग-भागकर सबका ख्याल रखना, स्वागत करना। इस छोटी उम्र में भी चिरंजीव माणिक  का योगदान सराहनीय है। उन्होंनें सबके ब्लाग, नाम, पते नोट किये, वीडियो बनाये, फोटो ली और सबके जलपान का ध्यान रखा। हम तनेजा परिवार और दूसरे आयोजकों के आभारी हैं। जो इस तरह सबसे मिलने का अवसर हमें दिया गया। (यह पोस्ट ब्लागर मीट के आयोजकों का आभार प्रकट करने के लिये लिखी है)
कुछ लोग जो ब्लागर मीट के आयोजकों पर ऊंगली उठाते हैं, उनसे कहना चाहूंगां कि एक बार वो भी इस प्रकार कोई मीटिंग रख कर दिखायें। लक्ष्मीनगर ब्लागर मीट और आयोजक पर जो कीचड फेंकी गई है, मैं उससे आहत हूं। पैसा खर्चा तो आप कर सकते हैं, मगर सेवाभाव, समर्पण और प्यार कहां से लायेंगें।
चाय, स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक्स तो पूरे समय उपलब्ध रही।  इसके अलावा जब हमें नाश्ता या लंच के तौर पर बडे-बडे पैकिट दिये गये तो मैं सोचने लगा कि इतना कैसे खाया जायेगा। बर्फी, गुलाब जामुन और मिल्ककेक को तो मैनें तुरन्त खा लिया, धीरे-धीरे समोसा भी खा लिया। । आयोजकों से क्षमाप्रार्थी हूं कि मैं ब्रेड पकौडा और अन्य सामग्री खा नही पाया क्योंकि पेट फूलने लगा था।
श्री अविनाश वाचस्पति जी ने सबको सोपानSTEP पत्रिका की एक-एक प्रति भेंट की। श्री प्रवीण पथिक जी, श्री विनोद पाण्डेय जी, श्री मयंक जी, श्री एम वर्मा जी, श्री जयकुमार झा जी, श्री शहनवाज जी, श्री खुशदीप सहगल जी, श्री इरफान जी, श्री सुलभ जी, श्री प्रतिभा कुशवाहा जी  इन सबको सामने देखकर मैं रोमांचित हो रहा था। श्री अजय झा जी द्वारा थोडी-थोडी देर में मुझसे पूछना - "और अमित कैसे हो?" मुझे ऐसा लगने लगा कि अरे मैं भी कुछ हूं।  इन  सब लोगों के साथ बैठ कर मुझे खुद पर गर्व सा होने लगा है।

12 comments:

  1. अन्तर सोहिल जी आप स्वभाव के बहुत अच्छे हैं, वहां पर सबसे मिलना एक सुखद अनुभव रहा. उस दिन तबियत कुछ ठीक नहीं थी, इसलिए मैं सोच रहा था, कि इतनी भीषण गर्मी में इतनी दूर जाना ठीक नहीं रहेगा.

    मैं अविनाश वाचस्पति जी और जय कुमार झा जी का बहुत आभारी हूँ, जिन्होंने मुझे व्यक्तिगत रूप से ब्लोगर सम्मलेन में आमंत्रण देकर, उसका हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया.

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  2. कुछ लोग जो ब्लागर मीट के आयोजकों पर ऊंगली उठाते हैं, उनसे कहना चाहूंगां कि एक बार वो भी इस प्रकार कोई मीटिंग रख कर दिखायें। लक्ष्मीनगर ब्लागर मीट और आयोजक पर जो कीचड फेंकी गई है, मैं उससे आहत हूं। पैसा खर्चा तो आप कर सकते हैं, मगर सेवाभाव, समर्पण और प्यार कहां से लायेंगें।

    बहुत खूब अंतर सोहिल जी ,कास आपकी बात कुछ मूर्खों को राह दिखा पाती ,खास कर उन मूर्खों को जो तथाकथित बड़े और पुराने ब्लोगर भी हैं और इन सारे विवाद की जड़ को हवा दे रहे हैं ,कुछ नए और अज्ञानी ब्लोगर के जरिये ,जिससे उनकी बेतुकी लेखनी को आंच न पहुंचे |

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  3. सब कुछ तो कह दिया अंतर सोहिल जी आपने

    बस मै इतना कहुंगा यह प्रेम सद्वभावना एवं समरसता आत्मीयता बनी रहे। राजीव जी के परिवार का सेवा भाव देख कर दिल गद गद हो गया।

    जारी रखिए आभार

    राम राम

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  4. भावनापूर्ण आपके उद्गार काफी भावुक बना दिया. वाकई ब्लागर मीट पर उँगली उठाने वालो पर दया आती है.
    क्या कहा जा सकता है अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग
    वैसे कोयला जलेगा तो राख ही होगा

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  5. आप आए..बहुत अच्छा लगा...आगे भी आते रहे...और भी ज्यादा अच्छा लगेगा

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  6. अमित भाई बाते करने ओर आयोजन करने मै फ़र्क है,आज के जमाने मै कोई सीधे मुंह नही बुलाता, पानी का गिलास नही पिलाता.... ओर यहां सब हाथ जोडे खडे है सेवा भाव से, खाने पीने की कमी भी नही, क्या इन के बच्चे की शादी थी? अरे जब कोई प्यार बांटे तो हमे भी उस सब की भावनाओ को समझना चाहिये, उन्हे सम्मान देना चाहिये... फ़रवरी मै मैने जो देखा मुझे बहुत अच्छा लगा, लगता है आज भी हम लोगो मै प्यार है, आप सब ने दिल से प्यार इज्जत दी, अजय झा, राजीव तनेजा जी, अविनाश.. यानि आप सब ने मुझे सर आंखॊ पर ही नही अपने दिल मै भी जगह दी... इसे आप सब का कर्ज नही कहूंगा, क्योकि कर्ज तो लोटाना होता है, इसे आप सब का प्यार कहुंगा जो हमेशा याद रहेगा, ओर कोशिश करुंगा कि एक बार आप सब के सहयोग से मै भी कोई ऎसा ही आयोजन करूं, ताकि एक बार फ़िर से हम सब मिल सके, बोलने वालो को मत सुनो. क्योकि बोलने वाले तो भगवान राम ओर कृषण पर भी बोलते है, बस आप सब युही मिलते रहे... भगवान से यही प्राथना है

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  7. वाकयी आयोजन करना मुश्किल काम है, जो नहीं कर पाते वे आलोचना करते हैं। लेकिन आप लोगों ने इतना खाया? अरे बाप रे पेट बेचारा फूलेगा नहीं तो क्‍या करेगा? पेट तो तोंद बन गयी होगी? बढिया आयोजन के लिए बधाई।

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  8. भाई बहुत ही भावपूर्ण प्रस्तुति है. ऐसे आयोजनो को खर्च किये हुए पैसे और खाये हुए व्यन्जनो से नही आत्मीयता और मिलनसारिता के पैमाने से ही देखा जा सकता है. तनेजा परिवार ने इस मामले मे वेहतरीन काम किया है. एक सन्शोधन, चिरन्जीव माणिक को हम श्री और जी के बजाय चिरन्जीव या प्रिय जैसे सम्बोधन दे तो अधिक अनुकूल होगा. उसका योगदान प्रशन्सनीय है.

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  9. @ H P SHARMA
    आदरणीय आपने बिल्कुल सही सुझाया। मैं आगे से ध्यान रखूंगा। यहां भी ठीक कर देता हूं। धन्यवाद

    प्रणाम स्वीकार करें

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  10. अपने व्यक्तिगत समय और पैसे के साथ साथ जो प्यार और स्नेह का उपहार यह आयोजक दे रहे हैं वह बेमिसाल है ! अजय झा, अविनाश वाचस्पति और तनेजा परिवार की जितनी तारीफ़ की जाये वह कम होगी ! काश ऐसे और लोग भी आगे आयें !

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  11. कुछ लोग हर कार्य में स्वार्थ देखते है | अपने पैदा होने में भी यह सोचते है कि मा बाप का क्या स्वार्थ रहा होगा जो उन्हें पैदा किया है | मेरी नजर में आयोजक और भाग लेने वाले दोनों ही महान है |

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मुझे खुशी होगी कि आप भी उपरोक्त विषय पर अपने विचार रखें या मुझे मेरी कमियां, खामियां, गलतियां बतायें। अपने ब्लॉग या पोस्ट के प्रचार के लिये और टिप्पणी के बदले टिप्पणी की भावना रखकर, टिप्पणी करने के बजाय टिप्पणी ना करें तो आभार होगा।