01 July 2017

ब्लॉगर्स से फेसबुकिया बनने पर

ब्लॉगर्स से फेसबुकिया बनने पर कौन-कौन क्या-क्या बन गया। तांगे में या रेस के घोडे को एक ऐनक/Blinker पहनाई जाती है....ताकि वो केवल सामने ही देख सके। ऐसे ही सभी ने ब्लिंकर्स पहने हैं और केवल नाक की सीध में ही देखते हुये लिखे जा रहे हैं। 

ब्लॉग्स पर रिसर्च और मेहनत करके ब्लॉग पर एक पोस्ट डाली जाती थी........टिप्पणीयों में सार्थक बहसबाजी होती थी.....पोस्ट गंभीर मुद्दे पर होने पर विषयानुरुप कई सारे ब्लॉगर्स अपने अपने ब्लॉग पर लिखते थे। विचार को विस्तार मिलता था। सही-गलत को समझने का भरपूर मौका होता था।  

एक पाठक के तौर पर जिन ब्लॉगर्स को फेवरिट समझता रहा...उनमें से कईयों की फेसबुक पर पोस्ट्स देखकर उबकाई आती है और कईयों को पढने पर हंसी..........कईयों पर खीझ पैदा होती है और कईयों पर गुस्सा...............अधिकतर ब्लॉगर्स मित्र फेसबुकिया बनने के बाद एक ही ट्रैक पर चल निकले हैं। वो खुद अगर अपनी फेसबुक वाल का मुहायना करें तो समझ जायेंगे कि वो क्या लिख रहे हैं और उन्हें चिंतन करना चाहिये कि वो ऐसा क्यों लिख रहे हैं। 

जब से ब्लॉगर्स ने फेसबुक का रुख किया........सभी ब्लॉगर्स एक दूसरे के सामने तलवारें खींचे दिखाई देने लगे। ब्लॉग्स लिखने वाले सभी ब्लॉगर्स या चिट्ठाकार होते थे। लेकिन फेसबुक पर आने के बाद सभी फेसबुकिये नहीं बने। कोई मोदीभक्त तो कोई आपिया, कोई वामपंथी तो कोई गौभक्त........ गुटबाजी/मठबाजी तब भी थी.. ..लेकिन इतने मनभेद नहीं थे... जितना फेसबुक ने कर दिया।

लगभग 300 ब्लॉग्स को फॉलो करता था......प्रतिदिन 50-60 पोस्ट अपडेट होती थी। उस समय चाहते थे कि कोई ऐसा फोन या डिवाईस आ जाये जिससे हिन्दी ब्लॉग्स को पढना और कमेंट करना आसान हो जाये। लेकिन जबसे ऐसी डिवाईसेज हाथों में आई तबसे ब्लॉगर्स को फेसबुक और व्हाट्सएप ने निगल लिया। सभी को जुकरबर्ग हिप्नोटाईज कर दिया...... ज्यादा से ज्यादा फॉलोवर बनाओ, हजारों मित्र और एक फोटो या एक पंक्ति पर सैंकडों कमेंट्स पाओ.... सेलिब्रिटी जैसा फील करो।

फेसबुक यानि समय-खपाऊ, सिर-खपाऊ, ऊर्जा-खपाऊ और बुद्धि-खपाऊ ने ब्लॉग्स के गांव को मिस्र की सभ्यता जैसे लील लिया है। कुछ दिन पहले अंशुमाला जी  ने हर महिने की पहली तारिख को अपने इस भूले-बिसरे ब्लॉग गांव में इकट्ठे होने का न्यौता दिया।  इस उजडे चमन को फिर से बसाने की कोशिश में उनकी तरकीब कई ब्लॉगर्स को पसन्द आई। इसके बाद ताऊ रामपुरिया जी ने तो पहली जुलाई 2017 को अंतराष्ट्रीय ब्लॉगदिवस ही घोषित कर दिया है और इस बारे में कई बार फेसबुक पर ब्लॉगर्स का आह्वान किया। ताऊ का लिखना छूटा था तो मेरा ब्लॉग्स को पढना छूट गया था। अब ताऊ का आदेश मानकर हम तो आ गये हैं अपने पसन्दीदा ब्लॉग्स को पढने और टिपियाने.......... 
चलते-चलते अपनी बनाई एक पुरानी पैरोडी भी यहां पेस्ट कर ही देता हुं :-)

तर्ज - एयरटेल विज्ञापन का सांग.......हरेक फ्रेंड जरुरी होता है
अनशन के लिये जैसे अन्ना होता है वैसे हर एक ब्लॉगर जरुरी होता है
ऐसे हर एक ब्लॉगर जरुरी होता है
कोई सुबह पांच बजे पोस्ट सरकाये
कोई रात तीन बजे टीप टिपियाये
एक तेरे ब्लॉग को फॉलोइंग करे
और एक तेरी पोस्ट पे लाईक करे
कोई नेचर से भूतभंजक कोई घोस्ट होता है
पर हर एक ब्लॉगर जरुरी होता है
एक सारी पोस्ट पढे पर कभी-कभी टिप्पी करे
एक सभी पोस्ट पर सिर्फ नाईस कहे
धर्मप्रचार का कोई ब्लॉग, कोई भंडाफोडू
कोई कहे जो तुझसे सहमत ना हो उसका सिर तोडूं
कोई अदला-बदला की टिप्पणी कोई लिंक देता है
लेकिन हर इक ब्लॉगर जरुरी होता है
इस गुट का ब्लॉगर कोई उस मठ का ब्लॉगर
कोई फेसबुक पर चैट वाला क्यूट-क्यूट ब्लॉगर
साइंस ब्लॉगर कोई ज्योतिष ब्लॉगर
कोई दीक्षा देने वाला बा-बा ब्लॉगर
कविता सुनाने वाला कवि ब्लॉगर
उलझन सुलझाने वाला वकील ब्लॉगर
पहेली पूछने वाला ताऊ ब्लॉगर
आपस में लडवाने वाला हाऊ ब्लॉगर
देश में घुमाने वाला मुसाफिर ब्लॉगर
विदेश दिखाने वाला देशी ब्लॉगर
तकनीक सिखाने वाला ज्ञानी ब्लॉगर
सबको हंसाने वाला कार्टूनिस्ट ब्लॉगर
ये ब्लॉगर, वो ब्लॉगर, हास्य ब्लॉगर, संजीदा ब्लॉगर
हिन्दू ब्लॉगर, मुस्लिम ब्लॉगर, नया ब्लॉगर, पुराना ब्लॉगर
चोर-अनामी
महिला ब्लॉगर-पुरुष ब्लॉगर
क से ज्ञ
हर इक सोच में अन्तर होता है
पर हर एक ब्लॉगर जरुरी होता है
लेकिन हर एक ब्लॉगर जरूरी होता है