26 November 2009

छैऊ का न्यौता

आज आपको सुनाता हूं एक पुराना हरियाणवी मजेदार चुटकुला

एक गांव में नत्थुलाल नाम का आदमी था। उसके सात बच्चे (छह बेटे और एक बेटी) थे, और सब के सब बडे पेटू थे। उनकी लडकी का नाम था शर्मिली । जिसे सब भाई प्यार से सरम कह कर बुलाया करते थे और सबसे छोटे लडके का नाम छैऊलाल था।

मित्रों हुआ नूं के एक बार गाम मै किसे कै दावत थी। उसनै सारे गाम आलां तै जिमण का न्यौता दिया। इन छह भाईयां के घर म्है न्यौता देन की बारी आयी तो सोचा के ये सारे के सारे भाई बहुत पेटु हैं, ये पहलां आगये तै सारे गाम का खाना खा ज्यांगें और इनकै न्यौता नही दिया तो बात गलत हो ज्यागी। तो सोचा एक जणे का न्यौता दे देते हैं। उन्होंने कहा - " नत्थुलाल जी, कल म्हारे यहां छैऊ का न्यौता है। (उन्होंने सबसे छोटे लडके का न्यौता दिया था)

आगले दिन सभी भाई जिमणे के लिये उनके यहां चले गये। मेजबान ने अपना माथा पीट लिया। गुस्से में उनसे कहा - "तम छैऊं के छैऊं जीमण आग्ये, शर्म नहीं आई"

वे छोरे बोले -  "ना जी सरम भैंसा की सानी करन लाग री थी, नूं करो उसका परोसा दे दो हम घरां ले जा कै सरम नै खिला दयांगें।"

छैऊं के छैऊं      -      छह के छह
जीमणा            -      खाना खाना
सानी                -      चारा

6 comments:

  1. भाई जद ही म्हारा न्युता कोनी दिया हम तो छैऊं ते भी दुणे थे। हम बाट देखते रहे म्हारा न्युता क्युं नही आया फ़ेर मुंजियां के जीमण मै तो घणा सुवाद आया करे। हा हा हा, राम-राम

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  2. या तो घनी माडी हो गई भाइ.:)

    रामराम.

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  3. BHAUT SUNDER COMMENTS BY SUSHIL

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  4. हा हा हा बहुत खूब्

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  5. यु तो भाई चालया ही पाट गया
    बहुत मजेदार जी.
    धन्यवाद

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  6. थारा चुटकुला पढ के जीमण की जी मै आण लाग गी | आजकल ऑफ सीजन चालै है |

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