05 January 2011

अलबेला जी ने मचाई धूम सांपला में

कवि सम्मेलन कार्यक्रम का शुभारम्भ तय समय पर ठीक शाम 7:00 बजे आरम्भ हो गया था। श्रोताओं के बैठने लिये 400-425 कुर्सियां लगाई गई थी। एक घंटे में करीबन 8:00-8:15 तक सभी सीटे फुल हो चुकी थी। उसके बाद जो श्रोता आये उन्हें इस आयोजन का लुत्फ खडे-खडे ही लेना पडा। हमने सोच रखा था कि कार्यक्रम का समापन रात्रि 11:00-11:30 बजे तक हो जायेगा। भई सर्दी बहुत ज्यादा थी और रात के खाने का समय भी हमने समाप्ति के बाद ही रखा था। लेकिन श्रोताओं की अविचल उपस्थिति ने कवियों को रात्रि 1:00 बजे तक अपनी रचनायें सुनाने के लिये मजबूर कर दिया। उधर खानसामों का भी बार-बार पैगाम आ रहा था कि तन्दूर ठंडा हो जायेगा और हमें भी आराम करना है, इसलिये रात्रि 1:00 बजे इस कार्यक्रम को विश्राम देना पडा। पूरी फिल्म तो बाद में दिखाई जायेगी, अभी आप छोटी सी झलक देखिये।




12 comments:

  1. फ़िल्म तो बाद मे देखेगे सब से पहले आप को इस सफ़लता की बधाई जी

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  2. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (6/1/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

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  3. बधाइयाँ जी बधाइयाँ
    अलबेला जी ने खूब जमाया रंग
    योगेन्द्र जी भी रहे उनके संग।

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  4. ट्रेलर से अपना काम नहीं चलने वाला:)
    इंतजार कर रहे हैं मित्र।

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  5. भले ही तंदूर ठंडा हो जाये, माहौल गर्म रहना चाहिये।

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  6. मजा आ गया सुन के
    वाह वाह
    पूरी फिल्म का इंतजार है।

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  7. वाकई अलबेला जी ने गजब की धूम मचाई
    पूरी वीडिओ देखकर बस हँसते ही रहे
    भरपूर आनंद आ गया
    आभार

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  8. सफल कार्यक्रम की बधाई स्वीकार करें.........

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  9. बहुत बहुत बधाई इस आयोजन के लिये । अलबेला जी समय पर आ गये थे? नहाने मे कितना समय लिया? वीडिओ देख रहे हैं। धन्यवाद।

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  10. सफल कार्यक्रम की बधाई स्वीकार करें.....

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  11. अमित जी,
    रिकॉर्डिंग ठीक नहीं हुई है। जैसी उम्मीद थी, वैसी साउंड नहीं आ रही है। कवि के मुकाबले दर्शकों के ठहाके ज्यादा गूंज रहे हैं। कवि क्या बोल रहा है, स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।
    यह अगली बार के लिये सबक है। बाकी सब बेहतरीन था।

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