10 February 2010

मातृभाषा में गाली

राजा भोज के दरबार में एक बार एक विद्वान आया। उसने राजा भोज के सामने एक शर्त रखी की आपके राज्य का कोई भी आदमी अगर मेरी मातृभाषा कौन सी है यह बता सके तो मैं उसे एक लाख स्वर्ण मुद्रायें भेंट करूंगा। लेकिन अगर आपके राज्य के सब विद्वान हार गये तो आप मुझे दस लाख स्वर्ण मुद्रायें देंगें। राजा भोज उसकी बात सुनकर आश्चर्य में पड गये। उनके दरबार में बडे-बडे विद्वान पंडित थे, जो पृथ्वी की हरेक भाषा का ज्ञान रखते थे। राजा भोज ने उस परदेशी विद्वान की शर्त मंजूर कर ली।
एक माह तक लगातार प्रतियोगिता चलती  रही। राज्य के पंडित हर रोज अलग-अलग भाषाओं में उस विद्वान से तर्क-वितर्क करते रहे। वह विद्वान हरेक भाषा का ऐसे उच्चारण करता था जैसे वही उसकी मातृभाषा है। लेकिन राज्य का कोई भी पंडित उस विद्वान की मातृभाषा नही बता सका।
आखिरी दिन जब सभी पंडितों ने हार मान ली, तो विद्वान ने राजा भोज से अपना पुरस्कार  ग्रहण किया। दस लाख स्वर्ण मुद्राओं की संदूक उठा कर जब वह सीढियों से नीचे उतरने लगा तो एकदम महाकवि कालीदास ने उस विद्वान को जोर से धक्का दे दिया। अचानक धक्का लगते ही विद्वान लुढकते हुए नीचे गिरा और गालियां देने लगा। कालीदास जी ने कहा - महानुभाव क्षमा करें मेरे पास यही तरीका था आपकी मातृभाषा जानने का। जिस भाषा में आप गालियां निकाल रहे हैं, वही आप की मातृभाषा है।

9 comments:

  1. bahut hi mazedaar...yet expressive bahut achha laga ye maatrabhasha ka kissa

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  2. वाकई सही है. आदमी क्रोध में अपनी औकात दिखा देता है.

    रामराम.

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  3. सुन्दर ज्ञानवर्धक कथा!

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  4. aap maane ya na maane aajkal to galiyan bhi angrezi me hi dete hai log!

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  5. हां बिल्कुल सही बात है.
    हमारी मातृभाषा हिन्दी है और हम हिन्दी मे गाली देते हैं, मुझे तो किसी इंग्लिश गाली की जानकारी भी नही है.
    एक्दम करेक्ट

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  6. वाह!वाह! क्या बात है. सुंदर..रोचक..मजा आ गया.

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  7. या तो वो संयोग था या भोजराजाका समय अलग था, आजकल बहुत सारे लोग गालीमें "ननसेन्स, इडियट्, डफर, साइको" आदि शब्दौंका ही इस्तेमाल करतें है, लेकिन वो अंग्रेजीमे पुरा बातचित नही करसकते हैं,कालीदास अगर ऐसे आदमी से टकराए तो उसे पता चलेगा,जो बात उस समयमे सच निकला था वो अब कहाँ होगा ?

    नेपालसे हिलारी अन द हिल साईड !

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