12 December 2015

चेहरे पे चेहरा लगाये रहता हूं मैं

चेहरे पे चेहरा लगाये रहता हूं मैं
खुद से खुद को छुपाये रहता हूं मैं
नजरें मिलाई तो मुजरिम ठहराओगे
इसलिये आंखें झुकाये रहता हूं मैं

सब कहते हैं अब भुला दूं तुमको
पर खुद को ही भुलाये रहता हूं मैं
अलविदा कहके चले तो गये तुम
फिर भी आस लगाये रहता हूं मैं

वक्त की हवाओं से डूब गये सूरज भी
तेरी यादों का दिया जलाये रहता हूं मैं
चेहरे पे चेहरा लगाये रहता हूं मैं
खुद से खुद को छुपाये रहता हूं मैं

2 comments:

  1. सही है, सोहिल साहब.

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  2. kya bat sir, maja aa jata hai aapke har ek post se. aap hamare blog bhi dekh sakte hai, Online Free Help

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