06 September 2015

मस्ताना उसी को कहते हैं

हर हाल में जो खुश रहे
मस्ताना उसी को कहते हैं
निकलता है जो दिल से
तराना उसी को कहते हैं


सोना गहना हीरे मोती
आज नहीं तो कल होगा
औलाद जिसकी लायक हो
खजाना उसी को कहते हैं

हाथ उठाना नारी पे
ताकतवर की बात नहीं
अबला की इज्जत जो रखे
मर्दाना उसी को कहते हैं

अपनी भाषा अपनी बोली
अपनी छत अपनी रोटी
अपने जैसे हों लोग जहां
ठिकाना उसी को कहते हैं

शमा पे यूँ तो हजारों
मंडराते हैं पतंगे लेकिन
इश्क में जो जल मिटा
परवाना उसी को कहते हैं 

घर से भागे शादी कर ली
किस्सें बहुत हैं दुनिया में
लैला-मजनूं सा प्रेम हुआ
फसाना उसी को कहते हैं 

हर हाल में जो खुश रहे
मस्ताना उसी को कहते हैं

6 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, सपनों का मतलब - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. हर हाल में जो खुश रहे
    मस्ताना उसी को कहते हैं
    सुंदर प्रस्तुति...

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