16 March 2013

एक कमरे में दो औरतें चुप बैठी हैं

असंभावित :
एक कमरे में दो महिलाएं बैठी हों , और दोनों चुप हों।
ऊपर की पंक्तियां डॉ० तारीफ दराल जी का फेसबुक अपडेट है। ज्यादातर ने कहा कि दोनों गूंगी हो तो ऐसा संभव है। लेकिन मेरा नजरिया कुछ दूसरा था। ऐसा संभव हो सकता है और मैनें वहां ये टिप्पणी की - "संभव है जी, ये दोनों सास-बहू हैं और पिछले 4 घंटे से आंगन में लडाई करके अब कमरे में पंखे के नीचे हवा खाने और सुस्ताने बैठ गयी हैं थोडी देर के लिये"  
खैर बातों-बातों में एक चुटकुला याद आ गया। आपने सुना भी हो तो दोबारा मुस्कुरा लें (होलियाना मूड है भई)
एक आदमी की चार बेटियां थी और चारों गूंगी नहीं तोतली थी। चारों लडकियों की उम्र शादी लायक हो गई थी, लेकिन उनके तुतलाने के कारण किसी का भी रिश्ता नहीं हो पा रहा था। एकबार कहीं दूर से मुश्किल से एक रिश्ता आया। संदेश आया कि फलाने दिन आपकी बेटियों को देखने के लिये लडकों की माता जी आ रही हैं। मां-बाप ने चारों बेटियों को खूब अच्छी तरह से समझाया कि किसी को कुछ भी बोलना नहीं है, जो लडकी चुप रहेगी उसी की शादी होगी। जो भी जवाब देना होगा गर्दन हिला कर दे देना। बाकि हम संभाल लेंगे। 
नियत दिन लडके वाले आये। उन्होंने लडकियों से खाना, सीना, पिरोना आदि सवाल किये तो लडकियों ने चुपचाप उनके सामने ही कार्य करके दिखा दिये। खाना परोसा गया, लडकों की माता जी के सामने लडकियां खाना परोस रही थी। 
बडी लडकी जिसने खाना बनाया था, अचानक पूछ ही लिया - "माता जी त्या थीर थ्वाद बनी है?" (माता जी क्या खीर स्वाद बनी है?)
दूसरी लडकी - "थ्वाद है, तभी तो लबड-लबड खा रही है"
तीसरी लडकी - "मां ने त्या तहा था? हमें तुप रहना है, बोलना नहीं है"
चौथी लडकी - "तुम तीनों बोल तुकी, पल मैं नहीं बोली। अब तो मेली शादी होगी, तुम्हाली नहीं"  
आगे क्या हुआ होगा आप अंदाजा लगा सकते हैं।

 

9 comments:

  1. बहुत शानदार चुटिला किस्सा सुनाया, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  2. हा हा हा ... यह भी खूब रही भैया !

    आज की ब्लॉग बुलेटिन यह कमीशन खोरी आखिर कब तक चलेगी - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. चौथी बोली - हम तो चुपचाप ही बैथे हैं। बचपन की सुनी कहानी थी, जो अभी तक गुदगुदाती है।

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  4. होली की हार्दिक शुभकामनायें!!!

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  5. लो जी बुलवा कल ही थोडा न ...

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